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गोद में लाचार बेटी, सामने डीएम कार्यालय और बेबस सिस्टम — कुशीनगर की तस्वीर ने सरकारी दावों की पोल खोल दी


कुशीनगर ब्यूरो
यह तस्वीर किसी भावनात्मक कहानी का दृश्य नहीं,
बल्कि कुशीनगर में ज़मीन पर दम तोड़ती सरकारी संवेदनशीलता की सच्ची तस्वीर है।

कुशीनगर में आयुष्मान भारत योजना की हकीकत उस वक्त सामने आई
जब एक पिता अपनी 21 वर्षीय पैरालिसिस पीड़ित बेटी को गोद में उठाकर
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा—
सिर्फ इसलिए कि उसे इलाज का हक़ मिल सके।

जिस योजना का दावा है कि गरीब, असहाय और गंभीर मरीजों को घर बैठे राहत मिलेगी,
उसी योजना के लिए एक लाचार पिता को
अपनी बीमार बेटी को गोद में लेकर
सरकारी दफ्तर की सीढ़ियां नापनी पड़ीं।

सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि
डीएम कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में
न व्हीलचेयर मिली,
न स्ट्रेचर,
न कोई कर्मचारी मदद के लिए आगे आया।

थकता पिता जब बेटी को संभाल नहीं पाता,
तो उसे रेलिंग पर बैठाकर
कुछ पल सांस लेता,
फिर दोबारा सिस्टम के दरवाज़े पर दस्तक देता—
इस उम्मीद में कि शायद अब किसी का दिल पसीज जाए।

फाइलों में आयुष्मान योजना “सर्वसुलभ” है,
लेकिन हकीकत में जरूरतमंद को
अपनी बेबसी उठाकर दफ्तर-दर-दफ्तर घूमना पड़ता है।

सवाल सिर्फ एक नहीं, कई हैं—

▪ क्या यही है प्रशासन की मानवीय सोच?
▪ क्या योजनाएं सिर्फ आंकड़ों और रिपोर्टों तक सीमित हैं?
▪ क्या ऐसी तस्वीरों के बाद भी जिम्मेदार चुप रहेंगे?

यह खबर सिर्फ कुशीनगर की नहीं,
यह पूरे सिस्टम पर लगा एक ऐसा सवाल है
जिसका जवाब अब टाला नहीं जा सकता।

अगर यह तस्वीर भी सिस्टम को नहीं जगा पाई,
तो फिर कौन जगाएगा?

About News Desk

✍️ Zafar Ahmad editor-in-chief Super fast times prayagraj

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