
सोमवार को पीड़ित अरुण कुमार ने उपजिलाधिकारी सेवराई से मुलाकात कर अपनी आपबीती सुनाई और तहसील स्तर पर चल रही अनियमितताओं से अवगत कराया। पीड़ित ने बताया कि कई महीनों से न्यायालय के चक्कर काटने के बावजूद मूल पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिससे वाद की सुनवाई प्रभावित हो रही है।
पीड़ित की बातों को गंभीरता से सुनने के बाद एसडीएम सेवराई ने आश्वासन दिया कि वह स्वयं प्रकरण की जांच कराएंगे। उन्होंने पीड़ित से कहा कि अगले गुरुवार को पुनः उपस्थित हों, तब तक संबंधित मूल पत्रावली खोजकर उपलब्ध करा दी जाएगी और पीड़ित के साथ न्याय किया जाएगा।
एसडीएम के आश्वासन के बाद पीड़ित को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या प्रशासन इस रहस्यमय ढंग से गायब हुई पत्रावली को वास्तव में खोज पाएगा या फिर पीड़ित को यूं ही तहसील के चक्कर काटने पड़ेंगे।
अब सबकी निगाहें अगले गुरुवार पर टिकी हैं, जब यह स्पष्ट होगा कि प्रशासनिक आश्वासन कागजों तक सीमित रहता है या पीड़ित को वास्तव में न्याय की राह मिलती है।
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