Breaking News

बलूचिस्तान में 4 छात्रों की हत्या के बाद उठे जबरन गायब होने के सवाल, 36 घंटे में हुई ये घटनाएं

पाकिस्तान के Balochistan प्रांत में पिछले 36 घंटों के भीतर चार बलूच छात्रों के शव मिलने से एक बार फिर जबरन गुमशुदगी और कथित फर्जी मुठभेड़ों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि इन युवाओं को पहले जबरन उठाया गया और बाद में उनकी हत्या कर दी गई।

स्थानीय मानवाधिकार संगठन Baloch Yakjehti Committee (BYC) का कहना है कि ये घटनाएं अलग-थलग नहीं हैं, बल्कि एक पैटर्न का हिस्सा हैं।


22 वर्षीय छात्र का शव अस्पताल से हिरासत के बाद मिला

22 वर्षीय जुनैद अहमद, जो सुराब का निवासी और ग्रेजुएशन छात्र था, को 23 जनवरी 2026 को कथित तौर पर जबरन उठाया गया। परिवार का आरोप है कि बाद में क्वेटा के एक अस्पताल से ईगल फोर्स और Counter Terrorism Department (CTD) के कर्मियों ने बिना वारंट हिरासत में लिया।
15 फरवरी को उसका शव बरामद हुआ, जिस पर गोली के निशान थे।


घर से उठाए गए अन्य छात्र भी मृत पाए गए

  • जंगीयान बलोच (पंजगुर): 26 मई 2025 को उठाए जाने का आरोप। 15 फरवरी 2026 को शव शापतान इलाके में मिला।

  • मुहनास बलोच (तुंप): 14 फरवरी को घर से उठाए जाने के बाद कथित तौर पर गोली मार दी गई।

  • नवाब अब्दुल्ला: मई 2025 में हिरासत में लिए जाने का आरोप। 8 महीने बाद 14 फरवरी को शव घर के बाहर फेंका मिला।

परिजनों ने इन मामलों में Inter-Services Intelligence (ISI) और Frontier Corps (FC) के कथित डेथ स्क्वॉड्स पर आरोप लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


जबरन गुमशुदगी के आंकड़े

Human Rights Council of Balochistan (HRCB) के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 1713 से अधिक बलूच युवाओं के जबरन ग़ायब होने के मामले दर्ज हुए हैं।
सिर्फ पिछले साल 390 से अधिक मामले सामने आए और 80 से ज्यादा लाशें बरामद हुईं।

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगी के आरोप 2000 के बाद से तेज हुए, जब यहां सशस्त्र विद्रोह ने नया रूप लिया।


प्राकृतिक संपदा बनाम स्थानीय असंतोष

बलूचिस्तान प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध क्षेत्र है। चाग़ई ज़िले का Reko Diq तांबा और सोने के विशाल भंडार के लिए जाना जाता है। इसी तरह Saindak Project एक प्रमुख खनन परियोजना है, जिसे चीनी कंपनी MCC संचालित करती है।

इसके अलावा Gwadar Port चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का अहम हिस्सा है। स्थानीय समूहों का आरोप है कि संसाधनों का लाभ बाहरी ताकतों और केंद्रीय सत्ता को मिल रहा है, जबकि आम जनता बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।


विद्रोह का लंबा इतिहास

बलूचिस्तान में असंतोष और विद्रोह का इतिहास 1947 से जुड़ा है। मौजूदा चरण 2000 के बाद से तेज हुआ, खासकर 2006 में नवाब अकबर बुगती की हत्या के बाद।

इस दौरान Baloch Liberation ArmyBaloch Liberation Front और Baloch Republican Army जैसे संगठन सक्रिय हुए, जिन्हें पाकिस्तान और कुछ अन्य देशों ने आतंकवादी संगठन घोषित किया है।


जटिल हालात

क्षेत्र में जारी हिंसा में इस वर्ष भी दर्जनों लड़ाकों और सुरक्षा बलों के मारे जाने की खबरें हैं। एक ओर सुरक्षा चिंताएं हैं, तो दूसरी ओर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोप।

विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान की स्थिति को समझने के लिए सुरक्षा, संसाधन वितरण, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मानवाधिकार—इन सभी पहलुओं को संतुलित रूप से देखना जरूरी है।

About SFT-ADMIN

Check Also

समंदर में कौन सबसे शक्तिशाली? 14 देशों के पास विमानवाहक पोत, भारत की स्थिति पर एक नजर

समुद्री ताकत की बात हो और विमानवाहक पोत (Aircraft Carrier) का जिक्र न हो, ऐसा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *