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आर्थिक मोर्चे पर चुनौतियों के बीच पाकिस्तान का डिफेंस पर फोकस, भारत से बड़ा अंतर कायम

 

पाकिस्तान सरकार ने नए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना बजट पेश किया है। कुल बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज से जुड़े भुगतान और रक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित किया गया है। बजट पेश किए जाने के दौरान राजनीतिक स्तर पर भी मतभेद देखने को मिले और विपक्ष ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बजट का सबसे बड़ा हिस्सा कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए रखा गया है। इसके अलावा रक्षा क्षेत्र के लिए भी पिछले वर्षों की तुलना में अधिक राशि आवंटित की गई है। सरकार का कहना है कि क्षेत्रीय और रणनीतिक जरूरतों को देखते हुए सुरक्षा क्षेत्र को मजबूत करना जरूरी है।

रक्षा बजट के मामले में भारत और पाकिस्तान के बीच अब भी बड़ा अंतर बना हुआ है। भारत का रक्षा खर्च आकार और संसाधनों के लिहाज से पाकिस्तान से कई गुना अधिक माना जाता है। भारतीय रक्षा बजट में सैन्य आधुनिकीकरण, सीमा सुरक्षा, उपकरणों की खरीद और तकनीकी क्षमता बढ़ाने जैसे कई क्षेत्रों पर निवेश किया जाता है।

पाकिस्तान सरकार ने अपने बजट में आर्थिक वृद्धि, महंगाई नियंत्रण और निवेश बढ़ाने के लक्ष्य भी बताए हैं। सरकार का अनुमान है कि आने वाले वित्त वर्ष में आर्थिक गतिविधियों में सुधार देखने को मिल सकता है।

बजट प्रस्तुति के दौरान सरकार ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय आर्थिक चुनौतियों के बावजूद आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ कम रखने की कोशिश की गई है। इसके लिए कुछ क्षेत्रों में सहायता और राहत योजनाओं का भी उल्लेख किया गया।

साथ ही छोटे कारोबार, कृषि क्षेत्र और निवेश को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय योजनाओं और प्रोत्साहन उपायों की बात भी सामने रखी गई। हालांकि आने वाले समय में इन घोषणाओं का वास्तविक असर आर्थिक प्रदर्शन और सरकारी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।

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