अमेरिका और चीन के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीन पर अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप और मतदाता डेटा हासिल करने के आरोप लगाने के बाद बीजिंग ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि चीन ने कभी अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप नहीं किया और न ही उसकी ऐसी कोई मंशा है। उन्होंने आरोपों को निराधार बताते हुए अमेरिका से अपील की कि वह चीन को अपने घरेलू राजनीतिक मुद्दों से जोड़ना बंद करे और दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में काम करे।
यह विवाद उस समय सामने आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि चीन ने कथित तौर पर लाखों अमेरिकी मतदाताओं का डेटा हासिल किया और चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चीन ने अमेरिकी कारोबारी समूहों और अन्य माध्यमों का उपयोग कर उनकी नीतियों का विरोध करने की रणनीति अपनाई।
ट्रंप ने आगे आरोप लगाया कि कथित तौर पर चीन ने कई राज्यों के मतदाता रिकॉर्ड तक पहुंच बनाई थी। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से कोई स्वतंत्र या आधिकारिक प्रमाण पेश नहीं किया गया है।
दूसरी ओर, चीन ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि वह किसी भी देश के चुनावी मामलों में दखल देने की नीति नहीं अपनाता। बीजिंग ने जोर देकर कहा कि अमेरिका को द्विपक्षीय संबंधों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से दूर रखना चाहिए।
गौरतलब है कि हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार की कोशिशें भी देखने को मिली हैं। ऐसे में चुनावी हस्तक्षेप को लेकर उठे नए आरोपों ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर कायम हैं और इस मामले में कोई स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
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