Breaking News

नेपाल से बांग्लादेश तक भारत की कूटनीतिक हलचल, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों से हुई चर्चा

भारत ने नेपाल और बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को लेकर एक साथ दो अहम कूटनीतिक कदम उठाए हैं। 10 अगस्त 2026 को काठमांडू में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से मुलाकात की। इसी दिन बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान से बातचीत की।

दोनों मुलाकातें ऐसे समय में हुई हैं, जब भारत के अपने दोनों पड़ोसी देशों के साथ संबंध कई संवेदनशील मुद्दों से गुजर रहे हैं। नेपाल में चीन की बढ़ती मौजूदगी और बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को लेकर भारत और ढाका के बीच पैदा हुई तल्खी के बीच इन बैठकों को खास महत्व दिया जा रहा है।

बालेन शाह से पहली वन-ऑन-वन मुलाकात

काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव और नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के बीच हुई बैठक को खास माना जा रहा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद शाह की किसी विदेशी राजनयिक के साथ यह पहली व्यक्तिगत यानी वन-ऑन-वन बैठक बताई जा रही है।

बैठक में भारत और नेपाल के बीच द्विपक्षीय संबंधों, आपसी हितों, विकास परियोजनाओं और दोनों देशों के बीच जारी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने मौजूदा साझेदारी को आगे बढ़ाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने पर भी बातचीत की।

नवीन श्रीवास्तव ने बैठक के बाद भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत और बहुआयामी साझेदारी बताते हुए इसे आगे बढ़ाने को लेकर चर्चा की जानकारी दी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बालेन शाह को शुभकामनाएं भी दीं।

चीन के साथ भी नेपाल का बढ़ रहा संपर्क

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह इससे पहले विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत मुलाकातों की जगह सामूहिक बैठकों को प्राथमिकता देते रहे हैं। ऐसे में भारतीय राजदूत के साथ उनकी पहली वन-ऑन-वन बातचीत को कूटनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि भारतीय राजदूत से मुलाकात के बाद नेपाल के प्रधानमंत्री की चीन के राजदूत झांग माओमिंग के साथ भी व्यक्तिगत बातचीत का कार्यक्रम बताया गया है।

भारत की ओर से बालेन शाह को पद संभालने के बाद देश आने का न्योता भी दिया जा चुका है। हालांकि, अभी तक उनकी भारत यात्रा नहीं हो पाई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच शीर्ष स्तर की कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर नजर बनी हुई है।

बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से भी मिले भारतीय उच्चायुक्त

उधर, बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने भी 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तारिक रहमान से मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई।

ढाका में भारत के उच्चायुक्त के रूप में जिम्मेदारी संभालने के छह सप्ताह से ज्यादा समय बाद त्रिवेदी की प्रधानमंत्री तारिक रहमान के साथ यह पहली मुलाकात बताई जा रही है।

बैठक में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और आपसी साझेदारी को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। ऐसे समय में यह मुलाकात हुई है जब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में कई संवेदनशील मुद्दों को लेकर चर्चा जारी है।

तारिक रहमान की भारत यात्रा पर भी नजर

तारिक रहमान के सितंबर में भारत आने को लेकर भी स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भारत की ओर से उन्हें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अभी अटकलें बनी हुई हैं।

दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने की एक प्रमुख वजह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना का भारत में रहना और उनके सार्वजनिक बयानों को लेकर ढाका की नाराजगी भी है।

शेख हसीना ने हाल में मीडिया से बातचीत में संकेत दिया था कि वह तमाम कानूनी जोखिमों के बावजूद बांग्लादेश लौटने और देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने के अपने इरादे पर कायम हैं।

शेख हसीना के बयान पर ढाका ने जताई थी नाराजगी

भारत में शेख हसीना की ओर से मीडिया को दिए गए बयान पर बांग्लादेश सरकार ने आपत्ति जताई थी। ढाका का कहना था कि इस तरह की गतिविधियों से वहां के लोगों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं और भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की कोशिशों को नुकसान पहुंच सकता है।

बांग्लादेश ने शेख हसीना पर गंभीर आरोप भी लगाए हैं और उन्हें देश से बाहर रहने वाली आरोपी के तौर पर पेश किया है।

हालांकि, भारत ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि शेख हसीना से जुड़े मीडिया कार्यक्रम के आयोजन में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। भारतीय पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया था कि उस कार्यक्रम में बांग्लादेश सरकार को लेकर कही गई बातों से वह खुद को जोड़कर नहीं देखता।

पड़ोसी देशों पर भारत की नजर

नेपाल और बांग्लादेश में एक ही दिन हुई इन दोनों उच्चस्तरीय मुलाकातों को भारत की पड़ोसी देशों के साथ सक्रिय कूटनीति के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ नेपाल में चीन का प्रभाव भारत के लिए अहम रणनीतिक मुद्दा है, वहीं बांग्लादेश के साथ राजनीतिक बदलाव के बाद संबंधों को स्थिर करना नई दिल्ली के लिए महत्वपूर्ण है।

ऐसे में दोनों पड़ोसी देशों के प्रधानमंत्रियों के साथ भारतीय प्रतिनिधियों की बातचीत आने वाले दिनों में क्षेत्रीय कूटनीति और भारत की पड़ोसी नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

About SFT-ADMIN

Check Also

चुनाव से पहले PoK में तनाव बढ़ा, फायरिंग में 2 की मौत का दावा; मतदान के बहिष्कार का ऐलान

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में लंबे समय से जारी विरोध-प्रदर्शन के बीच चुनाव …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *