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ईरान के डर से ट्रंप ने बदली उड़ान? तुर्किए से एयरफोर्स वन के बजाय गुप्त विमान में हुए सवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किए से वापसी के दौरान ट्रंप ने अपने आधिकारिक एयरफोर्स वन के बजाय एक गुप्त सैन्य विमान से उड़ान भरी थी। माना जा रहा है कि यह फैसला ईरान की ओर से सामने आए कथित जान के खतरे को देखते हुए लिया गया था।

दिलचस्प बात यह रही कि राष्ट्रपति की असली यात्रा को गुप्त रखने के लिए एक तरह की सुरक्षा रणनीति अपनाई गई। व्हाइट हाउस की ओर से पहले संकेत दिया गया था कि ट्रंप अपने आधिकारिक विमान से ही रवाना होंगे, लेकिन असल में उन्हें दूसरे विमान में स्थानांतरित कर दिया गया।

तुर्किए से निकलते वक्त बदली गई पूरी योजना

डोनाल्ड ट्रंप नाटो सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए तुर्किए की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। यात्रा के दौरान उन्होंने कतर की ओर से उपलब्ध कराए गए और हाल ही में अपग्रेड किए गए विमान का इस्तेमाल किया था।

लेकिन वापसी के समय सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई। ईरान के साथ बढ़ते तनाव और राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चिंता के बीच ट्रंप को आधिकारिक विमान से अलग कर एक छोटे सैन्य विमान में पहुंचाया गया।

इस पूरी कवायद को इस तरह अंजाम दिया गया कि बाहर से देखने वालों को यही लगे कि राष्ट्रपति पुराने एयरफोर्स वन से ही यात्रा कर रहे हैं।

कैटरिंग ट्रक की आड़ में बदला विमान

राष्ट्रपति की सुरक्षा के लिए अपनाई गई रणनीति काफी गोपनीय रखी गई थी। ट्रंप को एयरपोर्ट पर कैटरिंग ट्रक की आड़ में छोटे सैन्य विमान Air Force C-32A तक पहुंचाया गया।

वहीं दूसरी ओर ट्रंप के पुराने एयरफोर्स वन को ही उनकी वास्तविक उड़ान के रूप में पेश किया गया। इससे वहां मौजूद पत्रकारों और व्हाइट हाउस के कई कर्मचारियों को भी यह पता नहीं चल पाया कि राष्ट्रपति असल में किस विमान में हैं।

यात्रा के दौरान पत्रकारों को विमान की खिड़कियों के पर्दे बंद रखने के लिए भी कहा गया था। इससे विमान के अंदर और बाहर की गतिविधियों को देखने की संभावना और कम हो गई।

ट्रंप ने पत्रकारों से किया मजाक

बाद में जब ट्रंप से इस पूरी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने संकेत दिया कि यह यात्रा जोखिम भरी हो सकती थी और अगर उनके साथ कुछ हो जाता तो विमान में मौजूद अन्य लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।

सुरक्षा योजना के तहत ट्रंप गुप्त विमान से ब्रिटेन के RAF Mildenhall एयरबेस पहुंचे। उनके वहां पहुंचने के कुछ ही समय बाद पत्रकारों को लेकर पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया।

इसके बाद ट्रंप दोबारा अपने मुख्य विमान में लौटे और एयरबेस पर मौजूद अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात की।

पहले भी अपनाई जा चुकी है ऐसी रणनीति

राष्ट्रपति को सुरक्षा कारणों से असली विमान से अलग विमान में भेजने की रणनीति अमेरिकी इतिहास में नई नहीं है। इससे पहले साल 2000 में तत्कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पाकिस्तान यात्रा के दौरान भी ऐसी ही एक रणनीति अपनाए जाने की जानकारी सामने आई थी।

उस समय भी राष्ट्रपति की वास्तविक उड़ान को छिपाने के लिए एक वैकल्पिक विमान का इस्तेमाल किया गया था। इसका उद्देश्य संभावित सुरक्षा खतरों के बीच राष्ट्रपति की सही लोकेशन और यात्रा की जानकारी को गुप्त रखना था।

ट्रंप के मामले में ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच इस तरह की सुरक्षा व्यवस्था ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, ट्रंप की यात्रा के दौरान सुरक्षा खतरे की वास्तविक प्रकृति और उसकी गंभीरता को लेकर आधिकारिक तौर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

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