कुशीनगर। बुद्धनगरी में देह व्यापार के गोरखधंधे में लिप्त बताए जा रहे मनोकामना होटल पर कसया पुलिस द्वारा की गई कथित छापेमारी अब महज एक सुनियोजित नाटक प्रतीत हो रही है। छापेमारी के दौरान होटल के कमरों में युवक-युवतियों के आपत्तिजनक हालात में पकड़े जाने के बावजूद न तो होटल को सील किया गया और न ही संचालक के खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज हुआ। यह स्थिति केवल सवाल नहीं, बल्कि कसया पुलिस की नीयत और कार्यशैली पर सीधा आरोप बनकर सामने आ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कसया पुलिस अपराध पर अंकुश लगाने के बजाय देह व्यापार जैसे समाज-विरोधी अपराधों को मौन संरक्षण दे रही है। पुलिस की यह चुप्पी साधारण लापरवाही नहीं, बल्कि संरक्षण की चीखती हुई गवाही मानी जा रही है, जो कानून-व्यवस्था के दावों को खोखला साबित करती है। मामला अब सिर्फ अनैतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुलिस की जवाबदेही, ईमानदारी और कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
सवाल उठना लाजमी है कि राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर संचालित हो रहे ये होटल वास्तव में वैध व्यवसाय के केंद्र हैं या फिर पुलिस की छत्रछाया में खुलेआम ऐय्याशी और देह व्यापार के अड्डे फल-फूल रहे हैं।
बताया जाता है कि कसया पुलिस को लंबे समय से मनोकामना होटल में देह व्यापार और अन्य अवैध गतिविधियों की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर पुलिस ने होटल पर छापेमारी की थी, जहां चार जोड़े युवक-युवतियां रंगरलियां मनाते हुए रंगे हाथों पकड़े गए। पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर थाने लाकर पूछताछ करने और कड़ी कार्रवाई का दावा किया था।
हालांकि, यह दावा भी जल्द ही खोखला साबित हो गया। छापेमारी के कुछ ही समय बाद हालात सामान्य हो गए। न होटल सील हुआ और न ही संचालक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की गई। यह स्थिति कसया पुलिस की मंशा पर गहरे संदेह की लकीर खींच रही है।
2023 में सील हुआ था मनोकामना होटल, फिर किसके इशारे पर खुला?
गौरतलब है कि 22 सितंबर 2023 को तत्कालीन उपजिलाधिकारी योगेश्वर सिंह के निर्देश पर कसया के तत्कालीन तहसीलदार नरेंद्र राम और तत्कालीन थानाध्यक्ष डॉ. आशुतोष तिवारी के नेतृत्व में राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम ने मनोकामना होटल पर छापा मारा था। उस दौरान होटल में कई युवक-युवतियां संदिग्ध अवस्था में पकड़े गए थे।
पूछताछ के दौरान होटल संचालक कोई भी वैध पंजीकरण या लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका था, जिसके बाद तहसीलदार द्वारा होटल को सील कर दिया गया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब होटल पहले ही अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर सील किया जा चुका था, तो फिर यह होटल किसके आदेश पर दोबारा बेखौफ संचालित हो रहा है?
क्या मनोकामना होटल का संचालक किसी ऊंचे रसूख की छत्रछाया में है? या फिर होटल की आड़ में चल रहे इस समाज-विरोधी धंधे को प्रशासनिक अथवा राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है? इन सवालों के जवाब अब भी हवा में हैं, लेकिन कसया पुलिस की चुप्पी कई गंभीर आशंकाओं को जन्म दे रही है।
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