बांग्लादेश क्रिकेट एक बार फिर बड़े विवाद के बीच घिर गया है. इस बार मामला सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि खिलाड़ियों ने खुलकर बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राष्ट्रीय टीम से जुड़े खिलाड़ियों ने साफ शब्दों में कहा है कि जब तक BCB के निदेशक एम. नजमुल इस्लाम अपने पद को नहीं छोड़ देते हैं, तब तक वे किसी भी तरह का क्रिकेट नहीं खेलेंगे
एक बयान से भड़का पूरा विवाद
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई, जब BCB निदेशक एम. नजमुल इस्लाम ने मीडिया से बातचीत के दौरान खिलाड़ियों को लेकर कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया, जिसे क्रिकेटर्स ने अपमानजनक बताया. खिलाड़ियों का कहना है कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जा सकती. बयान सामने आते ही ड्रेसिंग रूम से लेकर क्रिकेट सर्किल तक नाराजगी फैल गई.
क्रिकेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन ऑफ बांग्लादेश के अध्यक्ष मोहम्मद मिथुन ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि यह फैसला किसी एक खिलाड़ी का नहीं, बल्कि सभी सीनियर और जूनियर क्रिकेटरों की साझा राय है. खिलाड़ियों ने तय किया है कि वे क्रिकेट में तब तक हिस्सा नहीं लेंगे, जब तक निदेशक अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं.
BPL पर मंडराया बड़ा खतरा
इस फैसले का सबसे बड़ा असर बांग्लादेश प्रीमियर लीग (BPL) पर पड़ सकता है. 15 जनवरी को बीपीएल में लीग चरण के 2 मुकाबले खेले जाएंगे. हालांकि अगर खिलाड़ी मैदान पर न उतरने का फैसला लेते है तो इससे न सिर्फ बोर्ड की साख को नुकसान होगा, बल्कि ब्रॉडकास्टर्स और स्पॉन्सर्स को भी भारी घाटा उठाना पड़ सकता है.
BCB ने किया डैमेज कंट्रोल
मामले की गंभीरता को समझते हुए BCB ने तुरंत एक आधिकारिक बयान जारी किया. बोर्ड ने कहा कि नजमुल इस्लाम के बयान उनकी निजी राय थे और उनका बोर्ड की सोच या नीति से कोई संबंध नहीं है. BCB ने यह भी माना कि अगर किसी बयान से खिलाड़ियों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो उसके लिए खेद जताया जाना चाहिए.
बोर्ड ने यह भी संकेत दिए हैं कि वह पूरे मामले की समीक्षा करेगा और अगर किसी अधिकारी का व्यवहार क्रिकेट और खिलाड़ियों की गरिमा के खिलाफ पाया गया, तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है. साथ ही BCB ने दोहराया कि खिलाड़ी ही बांग्लादेश क्रिकेट की असली ताकत हैं और उनका सम्मान व कल्याण बोर्ड की पहली प्राथमिकता है.
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