कानपुर के एलएलआर अस्पताल का नेत्र रोग विभाग मोतियाबिंद की जांच के दौरान लोगों में छिपी हुई बीमारियों का भी खुलासा कर रहा है। सर्दी के मौसम में रोजाना 200 से अधिक मरीज मोतियाबिंद की सर्जरी के लिए ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की है, जिनकी सर्जरी से पहले की जांच में अनियंत्रित डायबिटीज सामने आ रही है।
एलएलआर अस्पताल की वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन ने बताया कि हर दिन औसतन 20 से 22 मरीज ऐसे मिल रहे हैं, जो मोतियाबिंद की सर्जरी कराने आए थे, लेकिन जांच में उनका ब्लड शुगर लेवल सामान्य से कहीं अधिक पाया गया। हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश मरीजों को पहले यह जानकारी ही नहीं थी कि वे डायबिटीज से ग्रसित हैं। ऐसे मरीजों की आंखों की सर्जरी को फिलहाल टालकर पहले एलएलआर अस्पताल में ही डायबिटीज का इलाज शुरू कराया जा रहा है।
डॉ. शालिनी मोहन के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों से आने वाले मरीजों में यह समस्या तेजी से सामने आ रही है। कई मामलों में मरीजों का शुगर लेवल 400 से 700 तक पाया गया है। इस स्तर पर डायबिटीज बेहद खतरनाक हो सकती है और डायबिटिक कीटोएसीडोसिस, हाइपरऑस्मोलर हाइपरग्लाइसेमिक स्टेट और गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया जैसी आपातकालीन स्थितियां उत्पन्न कर सकती है, जो आंखों की नसों के साथ-साथ किडनी को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं।
बिल्हौर के 66 वर्षीय दौलत राम शुक्ला इसका एक उदाहरण हैं। मोतियाबिंद की सर्जरी से पहले जांच में उनका शुगर लेवल 400 के करीब पाया गया। दौलत राम ने बताया कि उन्हें चक्कर आना और बार-बार पेशाब की समस्या थी, लेकिन उन्होंने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया था।
इसी तरह, फतेहपुर के खागा निवासी जितेंद्र गौतम आंखों में काले धब्बे दिखने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे थे। जांच में मोतियाबिंद के साथ उनका शुगर लेवल करीब 500 निकला।
डॉक्टरों के मुताबिक,डायबिटीज के कुछ सामान्य लेकिन अनदेखे लक्षणों में बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, थकान, सिर दर्द, धुंधला दिखना, उल्टी, पेट दर्द, सांस लेने में कठिनाई, चक्कर आना और बेहोशी शामिल हैं। इन लक्षणों को नजर अंदाज करना भारी पड़ सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि समय रहते जांच और इलाज से न सिर्फ आंखों की रोशनी बचाई जा सकती है, बल्कि डायबिटीज से होने वाली गंभीर जटिलताओं से भी बचाव संभव है। एलएलआर अस्पताल में सामने आ रहे मामले लोगों के लिए एक बड़ी चेतावनी हैं। आंखों की जांच के साथ-साथ नियमित ब्लड शुगर जांच भी बेहद जरूरी है।
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