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एक्सपर्ट ने बताया: बच्चों में कमर और गर्दन के दर्द के पीछे की वजह और समाधान

आजकल कम उम्र में ही बच्चों में पीठ और गर्दन दर्द की शिकायतें बढ़ रही हैं। क्लासरूम हो या घर, कई बच्चे झुककर बैठते हैं, कंधे आगे की ओर गोल और गर्दन बाहर निकली हुई दिखाई देती है। खराब पोश्चर अब सिर्फ दिखने की समस्या नहीं रह गई, बल्कि यह मांसपेशियों में खिंचाव, थकान, सांस लेने में दिक्कत और एकाग्रता पर भी असर डाल सकती है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बबीता जैन ने मीडिया से बातचीत में बताया कि आज के बच्चे उन समस्याओं का सामना कर रहे हैं जो पहले अधिकतर वयस्कों में देखी जाती थीं। महामारी के बाद बदली जीवनशैली और बढ़े स्क्रीन टाइम ने बच्चों की रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डाला है।

ऑनलाइन पढ़ाई, स्मार्टफोन, टैबलेट, लैपटॉप और गेमिंग कंसोल के लंबे इस्तेमाल से बच्चे घंटों एक ही स्थिति में बैठे रहते हैं। अक्सर वे बिस्तर या सोफे पर बिना सही सहारे के झुककर बैठते हैं। इससे कंधे गोल हो जाते हैं और गर्दन आगे की ओर झुक जाती है, जिसे आमतौर पर ‘टेक्स्ट नेक’ कहा जाता है। यह स्थिति मांसपेशियों में लगातार तनाव पैदा करती है।

आउटडोर खेलों में कमी भी बड़ी वजह

दौड़ना, कूदना और खेलना बच्चों की कोर और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। जब शारीरिक गतिविधि कम हो जाती है, तो रीढ़ को सहारा देने वाली मांसपेशियां कमजोर पड़ने लगती हैं। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे जल्दी थक जाते हैं, झुककर बैठते हैं और दर्द की शिकायत करने लगते हैं।

इसके अलावा, भारी स्कूल बैग भी समस्या को बढ़ाते हैं, खासकर जब बच्चे उसे एक ही कंधे पर टांगते हैं। गर्दन या कमर में बार-बार दर्द, कंधों का असमान दिखना, लगातार झुककर बैठना या थोड़ी देर बैठने में भी असहजता महसूस होना शुरुआती संकेत हो सकते हैं। समय पर ध्यान न दिया जाए तो आगे चलकर क्रॉनिक दर्द या रीढ़ की संरचना से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।

कैसे सुधारें बच्चों का पोश्चर?

अच्छी बात यह है कि कुछ आसान उपाय अपनाकर इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है:

  • रोजाना शारीरिक गतिविधि और आउटडोर खेल के लिए प्रेरित करें

  • स्ट्रेचिंग या योग को दिनचर्या में शामिल करें

  • स्क्रीन टाइम सीमित रखें

  • बैठते समय पीठ सीधी रखें, पैर जमीन पर सपाट हों

  • स्क्रीन आंखों के स्तर पर रखें

  • स्कूल बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन का 10–15% से ज्यादा न हो

छोटी-छोटी सही आदतें बच्चों की रीढ़ को लंबे समय तक स्वस्थ रख सकती हैं। समय रहते जागरूकता और अभिभावकों का सहयोग ही बच्चों को दर्दमुक्त और आत्मविश्वासी बनाए रखने में मददगार साबित होगा।

Disclaimer: यह जानकारी विशेषज्ञों की राय और उपलब्ध शोध पर आधारित है। इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी नई गतिविधि या व्यायाम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।

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