काशीवासियों को तीन दिन से गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण फिर से बाढ़ का सामना करना पड़ रहा है। वरुणा और गंगा क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को अपना घर खाली करना पड़ा। जियालाल ने बताया कि यह एक महीने में दूसरी बार है जब उन्हें बेघर होना पड़ा है। घर खाली करने और फिर सजाने में खर्च और समय लगने के कारण आमदनी पर असर पड़ा है, वहीं बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं।
प्रशासन ने सभी बढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है और रहने और खाने का इंतजाम किया गया है। वरुणा क्षेत्र के निचले इलाकों में लोग घर खाली करते दिखे। अस्सी क्षेत्र में भी गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण नाले का पानी घरों में घुस गया है, जिससे आने-जाने में परेशानी और बीमारी का खतरा बढ़ गया है। कई परिवार किराए के मकानों में शिफ्ट हुए हैं।
स्थानीय दुकानदारों ने बताया कि यह दूसरी बार है जब उन्हें अपनी दुकान हटानी पड़ी, जिससे उनका रोज़ाना का काम प्रभावित हुआ है। कई परिवारों की दुकानें पिछले 46 दिनों से प्रभावित हैं और बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पाई है।
वरुणा तटवर्ती क्षेत्र में बच्चों को नाव से स्कूल भेजा जा रहा है। कुछ बुजुर्ग घरों में फंसे हुए हैं और उन्हें दवा या अन्य मदद लेने में कठिनाई हो रही है। जियालाल ने बताया कि उनका घर भी भर गया है और रोज़ी-रोटी की चिंता है।
हरिश्चंद्र घाट और मणिकर्णिका घाट जलमग्न हैं। घाटों में दाह संस्कार में लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। बाढ़ के कारण शहर के 16 मोहल्ले और 18 गांव प्रभावित हुए हैं, 843 परिवार और 3526 लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। 6507 किसानों की 1597.28 हेक्टेयर फसल बाढ़ में डूब गई है। दशाश्वमेध घाट पर शीतला मंदिर और अस्सी से राजघाट के बीच तीन हजार से अधिक मंदिर पानी की चपेट में हैं।
जिला प्रशासन ने 46 बाढ़ राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें से 17 को सक्रिय किया गया है।