सीतापुर में बीते छह दिनों से बाघ की दहशत ग्रामीणों की दिनचर्चा प्रभावित कर रही है। बाघ को पकड़ने के लिए दुधवा से आए एक्सपर्ट की टीम और डब्ल्यूटीआई टीम सहित करीब 50 लोगों की टीम बाघ को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है।
बाघ को पकड़ने के लिए वन विभाग प्रभावित गांव की पीएचसी को अपना कमांड सेंटर बनाकर थर्मल ड्रोन से बाघ की तलाश में जुटी है। नतीजा बाघ की कोई खबर नहीं मिल रही है।
मालूम हो कि विकासखंड महोली इलाके के ग्राम नरनी में बीती 22 अगस्त को बाघ ने हमला कर एक किसान शुभम दीक्षित को अपना निवाला बनाया था। किसान की मौत के बाद एक्टिव हुए वन विभाग ने प्रभावित इलाके में करीब 20 ट्रैप कैमरे, बकरी सहित दो जाल और तीन मचान से निगरानी कर बाघ को पकड़ने का जाल बिछाया है।
इसके बावजूद बाघ का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। सिर्फ पगचिह्न तक ही विभाग सीमित रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बाघ की दहशत के चलते मवेशियों को हरा चारा मिलने की भी दिक्कत हो गई अब सिर्फ गांव के मवेशी सूखे भूसे के सहारे ही रहा रहें है। इसके साथ फसलों की रखवाली भी प्रभावित हुई है।
डीएफओ नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघ की लोकेशन नहीं मिल पा रही है सिर्फ उसके पगचिह्न ही मिल रहे है इसलिए बहुत कुछ ऐसे कहना संभव नहीं है। बाघ लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा है और वन विभाग लगातार पगचिह्न के आधार पर कांबिंग कर बाघ को पकड़ने में लगा हुआ है।