हाटा सुकरौली कुशीनगर
कुशीनगर जिले के हाटा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत सुकरौली नगर पंचायत के वार्ड नंबर 5 से प्रशासनिक संवेदनहीनता का एक गंभीर और चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां कई परिवार ऐसे हैं, जिनके घरों तक पहुंचने के लिए आज तक कोई भी सार्वजनिक रास्ता उपलब्ध नहीं कराया गया है। चारों ओर निजी रकबा की जमीन होने के कारण बरसात के मौसम में पूरे इलाके में जलभराव हो जाता है, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घर से बाहर निकलना दूभर हो जाता है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस समस्या को लेकर वे कई बार उपजिलाधिकारी (SDM) हाटा को लिखित प्रार्थना पत्र दे चुके हैं। जनसुनवाई में भी अपनी पीड़ा रखी गई और सुकरौली नगर पंचायत के चेयरमैन राजनेति कश्यप से भी बार-बार समाधान की मांग की गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज तक न तो किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थलीय जांच की और न ही रास्ता निकलवाने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया गया।
इस पूरे मामले में सबसे अधिक मार्मिक स्थिति वार्ड में रहने वाली गुड़िया देवी की है, जो पूरी तरह से नेत्रहीन हैं। रास्ते के अभाव और बरसात में जलभराव के कारण उनका घर से बाहर निकलना जान जोखिम में डालने जैसा हो जाता है। यह स्थिति न केवल मानवीय संवेदना को झकझोरती है, बल्कि दिव्यांग अधिकारों और संविधान द्वारा प्रदत्त गरिमामय जीवन के अधिकार पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर आंख मूंदे बैठे हैं। जनता अब खुलकर सवाल उठा रही है कि जब मामला जनसुरक्षा, दिव्यांगों के अधिकार और इंसानी सम्मान से जुड़ा है, तो आखिर प्रशासन और नगर पंचायत कब जागेगी?
क्या किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही रास्ता मिलेगा, या पीड़ित परिवारों को उनका वैध और सुरक्षित अधिकार समय रहते मिल पाएगा?
अब यह मुद्दा पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है और लोग प्रशासन की चुप्पी को लेकर आक्रोशित हैं।
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