India US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील इस साल के पहले छह महीनों में हो सकती है. यह बात यूरेशिया ग्रुप के प्रमुख और दुनिया के जाने माने जोखिम विश्लेषक इयान ब्रेमर ने कही है. उनका कहना है कि भारत पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी 2026 में भारत के लिए बड़े जोखिमों की सूची में शायद शामिल भी न हो. ब्रेमर के मुताबिक, यह मुद्दा 2025 में जरूर बड़ा है, लेकिन 2026 में इसकी अहमियत काफी कम हो जाएगी.
एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में इयान ब्रेमर से भारत अमेरिका ट्रेड डील की टाइमलाइन को लेकर सवाल किया गया. इस पर उन्होंने साफ कहा, ‘भारत अमेरिका ट्रेड डील इस साल के पहले हाफ में हो जाएगी.’
कई महीनों से चल रही है बात
भारत अमेरिका ट्रेड डील पर पिछले कई महीनों से बातचीत चल रही है, लेकिन अगस्त 2025 में दोनों देशों के रिश्तों में उस समय खटास आ गई, जब अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा दिया. यह टैरिफ भारत द्वारा रूस से तेल खरीद जारी रखने के कारण लगाया गया था.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 दिसंबर को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से आखिरी बार बातचीत की थी. यह बातचीत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे के कुछ ही समय बाद हुई थी. इसके बाद दिसंबर में अमेरिकी डिप्टी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव रिक स्विट्जर के भारत दौरे के बाद केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील को लेकर बातचीत एडवांस स्टेज में है.
डोनाल्ड ट्रंप ने दिया था बयान
इससे पहले आज राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनके रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन टैरिफ को लेकर असहमति है. ट्रंप ने कहा, ‘मेरे प्रधानमंत्री मोदी के साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं, लेकिन वह मुझसे खुश नहीं हैं, क्योंकि भारत को ज्यादा टैरिफ देना पड़ रहा है. हालांकि अब भारत ने रूस से तेल खरीद को काफी हद तक कम किया है.’
ट्रेड डील को लेकर स्थिति में लगातार बदलाव और किसी तय समयसीमा के न होने से भारत के निर्यातकों पर दबाव बढ़ गया है, खासकर नए वित्तीय वर्ष से पहले. अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ से भारत के कई घरेलू निर्यात सेक्टर बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. इनमें लेदर, केमिकल्स, फुटवियर, जेम्स एंड ज्वैलरी, टेक्सटाइल और झींगा उद्योग शामिल हैं. इन क्षेत्रों को आने वाले दिनों में राहत मिलने की उम्मीद है.
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