भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को स्थगित रखने के फैसले के बाद पाकिस्तान में इस मुद्दे पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने सिंध प्रांत के कई शहरों में रैलियां और प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें कार्यकर्ताओं ने संधि से जुड़े मुद्दे पर विरोध जताया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कराची से लेकर शिकारपुर तक आयोजित प्रदर्शनों में पार्टी नेताओं और समर्थकों ने सिंधु नदी के जल अधिकारों को लेकर नारे लगाए। PPP का कहना है कि यह मुद्दा पूरे पाकिस्तान से जुड़ा है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाना चाहिए।
सिंध सरकार के एक मंत्री ने भी इस विषय पर बयान देते हुए कहा कि सिंधु नदी का पानी देश के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और यदि जल आपूर्ति प्रभावित होती है तो इसका असर पूरे पाकिस्तान पर पड़ेगा। वहीं, पार्टी अध्यक्ष बिलावल भुट्टो के भाषण का हवाला देते हुए कुछ नेताओं ने भारत के फैसले का विरोध किया और कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के खिलाफ कई सख्त कदम उठाए थे। इन्हीं में सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का निर्णय भी शामिल था। भारतीय पक्ष का कहना है कि यह फैसला आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश देने और सीमा पार आतंकवाद पर दबाव बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।
पिछले कुछ समय में पाकिस्तान के कई राजनीतिक और सरकारी प्रतिनिधि भी इस मुद्दे पर तीखी प्रतिक्रियाएं दे चुके हैं। हालांकि, दोनों देशों के बीच इस विषय पर फिलहाल कोई नई आधिकारिक वार्ता की घोषणा नहीं हुई है।
सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच सिंधु नदी प्रणाली के जल बंटवारे को लेकर महत्वपूर्ण माना जाता है। वर्तमान परिस्थितियों में इस संधि को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है।
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