अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने व्हाइट हाउस में करीब 90 मिनट तक महत्वपूर्ण बैठक की। दोनों नेताओं ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत चर्चा की।
बताया जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य तत्काल सैन्य कार्रवाई पर फैसला लेना नहीं था, बल्कि मौजूदा हालात में उपलब्ध सभी विकल्पों का आकलन करना था। चर्चा में कूटनीतिक प्रयासों, आर्थिक प्रतिबंधों और संभावित सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दे शामिल रहे।
ईरान को लेकर तीन प्रमुख विकल्पों पर विचार
बैठक में ईरान से जुड़े तीन प्रमुख विकल्पों पर चर्चा हुई। पहला विकल्प बातचीत के जरिए समाधान निकालने का था। अमेरिकी प्रतिनिधियों द्वारा ईरानी अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, हालांकि दोनों पक्षों के बीच कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं।
दूसरा विकल्प ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का था। इसके तहत समुद्री गतिविधियों पर निगरानी और मौजूदा प्रतिबंधों को और सख्त करने जैसे उपायों पर विचार किया गया।
तीसरा विकल्प यह था कि यदि कूटनीतिक प्रयास और आर्थिक प्रतिबंध अपेक्षित परिणाम नहीं देते हैं, तो भविष्य में सीमित या व्यापक सैन्य कार्रवाई की संभावना पर भी विचार किया जा सकता है।
बैठक के बाद बढ़ा तनाव
बैठक के कुछ समय बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया। ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित एक अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर मिसाइल हमला किए जाने की खबर सामने आई। इसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी। हालांकि, जानकारी के अनुसार बैठक में इजरायल की ओर से अमेरिका पर तत्काल सैन्य कार्रवाई शुरू करने का दबाव नहीं डाला गया और अंतिम निर्णय अमेरिका पर छोड़ दिया गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी हुई चर्चा
दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के वैश्विक आर्थिक प्रभावों पर भी विचार किया। चर्चा के दौरान ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर संभावित असर को लेकर चिंता जताई गई। यह भी माना गया कि यदि क्षेत्र में संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक बाजारों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
सीरिया और सऊदी अरब भी रहे एजेंडे में
बैठक में सीरिया की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभाव और आतंकवादी संगठनों से जुड़े मुद्दों पर दोनों नेताओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण साझा किए।
इसके अलावा अमेरिका और सऊदी अरब के संभावित परमाणु सहयोग तथा सऊदी अरब और इजरायल के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में चल रहे प्रयासों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर
बैठक के दौरान इजरायल ने रक्षा क्षेत्र में दीर्घकालिक आत्मनिर्भरता की अपनी योजना से भी अमेरिका को अवगत कराया। बताया गया कि आने वाले वर्षों में देश आधुनिक रक्षा प्रणालियों, मिसाइल सुरक्षा तकनीक और उन्नत लड़ाकू विमानों के विकास पर अधिक ध्यान देगा, ताकि विदेशी सैन्य सहायता पर निर्भरता धीरे-धीरे कम की जा सके।
फिलहाल अमेरिका और इजरायल की इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद पश्चिम एशिया की स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयासों और क्षेत्रीय घटनाक्रम के आधार पर आगे की रणनीति तय होने की संभावना है।
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