ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ‘Mosquito Fleet’ एक ऐसी समुद्री रणनीति है, जिसकी चर्चा हाल के वर्षों में काफी बढ़ी है। यह पारंपरिक नौसेना की तरह बड़े युद्धपोतों पर आधारित नहीं है, बल्कि तेज रफ्तार, छोटी और हल्की हथियारबंद नौकाओं के बड़े समूह पर आधारित है। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यही रणनीति फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में ईरान की अहम ताकत मानी जाती है।
क्या है Mosquito Fleet?
‘Mosquito Fleet’ नाम उन छोटी और तेज गति वाली नौकाओं के बेड़े को दिया जाता है, जो संख्या में अधिक होने के कारण सामूहिक रूप से बड़े युद्धपोतों को चुनौती देने की क्षमता रखती हैं। इन नौकाओं को एंटी-शिप मिसाइल, रॉकेट, मशीनगन, ड्रोन और अन्य हथियारों से लैस किया जा सकता है।
इस बेड़े में तेज गति वाली अटैक बोट्स, छोटी मिसाइल नौकाएं, आत्मघाती नौकाएं और गदीर श्रेणी की लघु पनडुब्बियां भी शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य बड़े नौसैनिक जहाजों पर अचानक हमला करना और तेजी से सुरक्षित क्षेत्र में लौट जाना होता है।
कैसे करती है काम?
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, ये नौकाएं समूह में संचालन करती हैं। किसी संभावित लक्ष्य के करीब पहुंचकर एक साथ कई दिशाओं से हमला करने की रणनीति अपनाई जाती है। इनका आकार छोटा होने के कारण इन्हें रडार पर पहचानना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है और तटीय क्षेत्रों में तेजी से छिपाया या स्थानांतरित किया जा सकता है।
ईरान ने अपने दक्षिणी तटों पर कई ऐसे नौसैनिक अड्डे और भूमिगत सुविधाएं विकसित की हैं, जहां इन नौकाओं को सुरक्षित रखा जाता है और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत तैनात किया जा सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में रणनीतिक भूमिका
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ईरान की नौसैनिक मौजूदगी और उसकी Mosquito Fleet को रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
रूस में भी हुई चर्चा
हाल के दिनों में रूस में भी इस तरह की नौसैनिक रणनीति पर चर्चा हुई है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया कि रूस छोटे, तेज और कम लागत वाले नौसैनिक प्लेटफॉर्म की उपयोगिता का अध्ययन कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक स्तर पर किसी नई रणनीति की विस्तृत घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिकी कार्रवाई की खबरें
हालिया तनाव के दौरान दक्षिणी ईरान के कुछ सैन्य ठिकानों और बंदरगाहों पर अमेरिकी हमलों की खबरें भी सामने आईं। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया कि इन हमलों में कुछ नौसैनिक संसाधनों को निशाना बनाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं।
क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि Mosquito Fleet पारंपरिक नौसेना की तुलना में कम लागत वाली लेकिन प्रभावी रणनीति का उदाहरण है। यह बड़े युद्धपोतों का सीधा मुकाबला करने के बजाय तेज गति, संख्या और अचानक हमले की रणनीति पर आधारित होती है। इसी वजह से यह मॉडल दुनिया के कई रक्षा विश्लेषकों और सैन्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
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