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अराघची ने विटकॉफ संग बातचीत का किया जिक्र, बोले- ईरान दबाव में आने वाला देश नहीं

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ हुई बातचीत को लेकर अपनी प्रतिक्रिया साझा की है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच संपर्क ऐसे समय में हुआ जब क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर था और किसी भी समय सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी हुई थी।

अराघची के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्होंने विटकॉफ से पूछा कि क्या उन्होंने कभी ऐसी परिस्थितियों में वार्ता की है, जहां हर पल बमबारी का खतरा मंडरा रहा हो। उन्होंने कहा कि उस समय माहौल बेहद तनावपूर्ण था और हालात सामान्य कूटनीतिक वार्ताओं से अलग थे।

ईरानी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ईरान बाहरी दबाव या सैन्य धमकियों के आगे झुकने वाला देश नहीं है। इसी संदर्भ में उन्होंने टिप्पणी की कि “ईरान, वेनेजुएला नहीं है”, जिसका आशय यह था कि तेहरान पर दबाव बनाकर उसकी नीतियों में बदलाव नहीं कराया जा सकता।

अराघची ने स्पष्ट किया कि विटकॉफ के साथ हुए संपर्क को औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता नहीं माना जाना चाहिए। उनके अनुसार, यह बातचीत विभिन्न मध्यस्थ देशों की पहल के तहत हुई थी और इसका उद्देश्य तनाव कम करने तथा संवाद बनाए रखना था।

बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच अलग-अलग चरणों में ओमान, इटली और स्विट्जरलैंड सहित कई स्थानों पर संपर्क हुआ। शुरुआती दौर में बातचीत अप्रत्यक्ष रूप से मध्यस्थों के जरिए हुई, जबकि बाद में कुछ मौकों पर दोनों प्रतिनिधियों की सीमित प्रत्यक्ष मुलाकात भी हुई। इसके अतिरिक्त, दोनों पक्षों के बीच संदेशों के आदान-प्रदान का एक अलग संचार माध्यम भी सक्रिय रहा।

विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बावजूद संवाद के चैनल खुले रहना क्षेत्रीय स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, दोनों देशों के बीच परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर अब भी गहरे मतभेद बने हुए हैं।

इस खबर में व्यक्त टिप्पणियां ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के सार्वजनिक बयान पर आधारित हैं। अमेरिका की ओर से इन सभी दावों पर समान या विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं है।

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