वैश्विक तनाव और युद्ध जैसे हालातों के बीच International Monetary Fund ने भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश का डिफेंस सेक्टर आने वाले समय में आर्थिक विकास को मजबूती दे सकता है।
आईएमएफ के अनुसार, India में घरेलू रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने से न सिर्फ विदेशी हथियारों पर निर्भरता कम हुई है, बल्कि इससे आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिली है। Make in India और Atmanirbhar Bharat जैसी योजनाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जब रक्षा खर्च देश के भीतर ही उत्पादन और उद्योगों को बढ़ावा देता है, तो इसका सीधा असर निवेश, रोजगार और उपभोग पर पड़ता है। इससे इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ावा मिलता है।
क्या कहता है IMF का विश्लेषण?
आईएमएफ के मुताबिक, रक्षा खर्च का “मल्टीप्लायर” लगभग 1 के आसपास होता है, यानी जितना खर्च बढ़ता है, उतनी ही आर्थिक गतिविधि भी बढ़ सकती है। हालांकि, यह प्रभाव उन देशों में ज्यादा होता है, जहां घरेलू डिफेंस इंडस्ट्री मजबूत होती है।
जो देश आयात (इंपोर्ट) पर ज्यादा निर्भर होते हैं, वहां इसका फायदा कम होता है क्योंकि पैसा विदेशी बाजारों में चला जाता है। इस मामले में भारत की स्थिति बेहतर बताई गई है, क्योंकि यहां लोकल मैन्युफैक्चरिंग और प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी बढ़ रही है।
भारत को कैसे होगा फायदा?
- घरेलू उत्पादन बढ़ने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
- निवेश और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी
- विदेशी आयात पर निर्भरता कम होगी
- आर्थिक संतुलन बेहतर रहेगा
आईएमएफ ने यह भी कहा कि डिफेंस सेक्टर में बढ़ोतरी “टारगेटेड डिमांड” की तरह काम करती है, जिससे सरकारी और निजी खर्च दोनों बढ़ सकते हैं और लंबे समय में प्रोडक्टिविटी में सुधार होता है।
क्या हैं जोखिम?
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर रक्षा खर्च बहुत तेजी से बढ़ता है, तो Fiscal Deficit और सार्वजनिक कर्ज बढ़ सकता है। इससे सामाजिक क्षेत्रों पर खर्च कम होने का खतरा भी रहता है।
कुल मिलाकर, आईएमएफ का मानना है कि अगर India घरेलू डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस बनाए रखता है, तो वह न सिर्फ आर्थिक विकास को तेज कर सकता है, बल्कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच खुद को ज्यादा मजबूत स्थिति में ला सकता है।
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