वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि क्या अमेरिका भविष्य में ईरान के खिलाफ जमीनी सैन्य अभियान (Ground Operation) शुरू कर सकता है। हालांकि, फिलहाल अमेरिकी प्रशासन ने ऐसी किसी कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बीते कुछ समय से अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों और रणनीतिक स्थानों पर हवाई हमले कर रही है। रिपोर्टों के अनुसार, इन अभियानों में सैन्य अड्डों, ड्रोन सुविधाओं, मिसाइल ठिकानों और लॉजिस्टिक नेटवर्क को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि इन अभियानों का उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा और अपने हितों की रक्षा करना है।
इसी बीच अमेरिकी संसद में हुई एक सुनवाई के दौरान ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन कैन से पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ जमीनी हमला करने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने किसी संभावित सैन्य योजना पर सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। हालांकि उन्होंने इतना जरूर कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति को विभिन्न सैन्य विकल्पों और उनसे जुड़े संभावित जोखिमों की जानकारी दी है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी जमीनी अभियान में अमेरिकी सेना को भारी चुनौतियों और संभावित नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। ईरान की भौगोलिक स्थिति, उसकी सैन्य तैयारियां और क्षेत्रीय परिस्थितियां ऐसे किसी भी अभियान को जटिल बना सकती हैं।
इस बीच विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सोशल मीडिया पर अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं, जिनमें फारस की खाड़ी और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियां बढ़ने की बात भी शामिल है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
उधर, ईरान लगातार कहता रहा है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण पूरे मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।
फिलहाल, अमेरिका की ओर से ईरान पर जमीनी हमला करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की सैन्य और कूटनीतिक गतिविधियां इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय कर सकती हैं।
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