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भोटेकोशी में बाढ़ से मची तबाही, भारत-चीन हुए सतर्क; IAF ने संभाला राहत मोर्चा

नेपाल में भोटेकोशी नदी में आई अचानक भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। रसुवा जिले में 26 अगस्त की सुबह आए तेज सैलाब ने कई बस्तियों, सड़कों, पुलों, वाहनों और अन्य बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। घटना के बाद नेपाल में बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

बाढ़ की भयावह तस्वीरों में पानी के तेज बहाव के साथ मलबा, पेड़ और चट्टानें बहती नजर आईं। कई स्थानों पर लोगों को सुरक्षित जगहों की ओर भागते देखा गया। कुछ इलाकों में सैलाब इतनी तेजी से पहुंचा कि लोगों को संभलने तक का समय नहीं मिल पाया।

भारत ने नेपाल के लिए भेजी राहत सामग्री

नेपाल में हालात बिगड़ने के बाद सरकार ने भारत और चीन से मदद मांगी। भारत ने तत्काल राहत एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराई है। भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए जरूरी राहत सामग्री, मेडिकल सामान और दवाइयां नेपाल भेजी गई हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने भारत की सहायता के लिए विदेश मंत्री एस. जयशंकर और भारत सरकार का आभार जताया है। भारत की ओर से आगे भी जरूरत के अनुसार राहत सामग्री भेजने की तैयारी की गई है।

PM मोदी ने नेपाली प्रधानमंत्री से की बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत की। उन्होंने नेपाल में हुई जनहानि और तबाही पर दुख जताते हुए संकट की इस घड़ी में हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।

भारत की एजेंसियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। भारत-नेपाल सीमा के आसपास सुरक्षा और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को सतर्क किया गया है।

बिहार में भी बढ़ी चिंता

नेपाल से आने वाले पानी को देखते हुए बिहार में भी प्रशासन अलर्ट मोड पर है। गंडक नदी के किनारे बसे इलाकों में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए NDRF और SDRF की तैयारियां बढ़ाई गई हैं।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और केंद्र की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।

भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशूली नदी प्रणाली से जुड़ती है। आगे चलकर यही नदी तंत्र भारत में गंडक नदी से जुड़ता है। इसलिए नेपाल में अचानक बढ़े जलस्तर का असर भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी पड़ सकता है।

अचानक कैसे आई इतनी भयावह बाढ़?

इस आपदा को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि नदी में अचानक इतना तेज उफान कैसे आया। शुरुआती आकलनों में भूस्खलन या बर्फ और मलबे के नदी में गिरने से अस्थायी अवरोध बनने की संभावना जताई जा रही है।

अगर भारी मात्रा में मलबा नदी के प्रवाह को कुछ समय के लिए रोक देता है, तो पीछे पानी का दबाव बढ़ सकता है। अवरोध टूटने पर पानी अचानक तेज रफ्तार से नीचे की ओर बढ़ सकता है। हालांकि, इस घटना के वास्तविक कारण की पुष्टि विस्तृत वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकेगी।

तबाही के बाद हर तरफ मलबा

सैलाब गुजरने के बाद प्रभावित इलाकों में कई फीट तक मलबा जमा होने की तस्वीरें सामने आई हैं। जहां पहले बाजार और दूसरी गतिविधियां होती थीं, वहां अब क्षतिग्रस्त इमारतें और कीचड़ नजर आ रहा है।

कई जगहों पर पुल और सड़कें भी क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुछ क्षेत्रों में हेलिपैड तक पानी और मलबे की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है, जिससे राहत अभियान में अतिरिक्त मुश्किलें पैदा हो रही हैं।

कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं प्रभावित

बाढ़ का असर नेपाल के पावर सेक्टर पर भी पड़ा है। रसुवा और नुवाकोट जिलों में नदी के आसपास बनी कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी है।

लांगटांग हाइड्रोपावर परियोजना से जुड़े करीब 60 लोगों के लापता होने की बात भी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव दल लगातार लोगों की तलाश कर रहे हैं।

भारत-नेपाल सीमा पर बढ़ाई गई निगरानी

नेपाल में जलप्रलय के बाद भारत ने सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। संभावित जलस्तर बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए आपदा राहत टीमों को तैयार रखा गया है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती जिलों में प्रशासन नदी के जलस्तर पर नजर रख रहा है। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता नेपाल में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है।

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