संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अफगानिस्तान से जुड़े एक महत्वपूर्ण सत्र के दौरान भारत ने पाकिस्तान के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। भारत के स्थायी प्रतिनिधि P Harish ने कहा कि अपनी आंतरिक चुनौतियों और विफलताओं के लिए दूसरे देशों को जिम्मेदार ठहराना पाकिस्तान की पुरानी प्रवृत्ति रही है और इस तरह के प्रयास अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भ्रमित नहीं कर सकते।
भारत ने बैठक में अफगानिस्तान में शांति, स्थिरता और विकास के लिए संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का समर्थन करते हुए कहा कि वहां कार्यरत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रयासों को कमजोर करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए। भारतीय प्रतिनिधि ने बहुपक्षीय सहयोग और संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं के प्रति सम्मान बनाए रखने पर भी जोर दिया।
अफगानिस्तान के भीतर सैन्य कार्रवाइयों और सीमा पार घटनाओं का उल्लेख करते हुए भारत ने नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता बताई। भारतीय पक्ष ने कहा कि किसी भी सैन्य कार्रवाई के दौरान अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों का पालन होना चाहिए ताकि आम लोगों को नुकसान न पहुंचे।
भारत ने यह भी कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद के मुद्दों पर दोहरे मानदंड अपनाने से क्षेत्रीय शांति को नुकसान पहुंचता है। भारतीय प्रतिनिधि के अनुसार, किसी भी प्रकार के हिंसक समूहों को राजनीतिक या वैचारिक रंग देकर उनके वास्तविक स्वरूप को छिपाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान भारत ने उन आरोपों को भी खारिज किया जिनमें कुछ आतंकी गतिविधियों को बाहरी समर्थन से जोड़ने की कोशिश की गई थी। भारतीय पक्ष का कहना था कि बिना प्रमाण लगाए गए आरोप केवल दुष्प्रचार को बढ़ावा देते हैं और इससे वास्तविक समस्याओं के समाधान में बाधा आती है।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह किया कि अफगानिस्तान में स्थिरता, मानवाधिकारों की सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सामूहिक प्रयासों को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही यह भी कहा कि क्षेत्रीय शांति तभी संभव है जब सभी देश जिम्मेदार व्यवहार अपनाएं और पारस्परिक आरोपों की राजनीति से ऊपर उठकर सहयोग का रास्ता चुनें।
संयुक्त राष्ट्र में हुई इस बहस ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की सुरक्षा, आतंकवाद और क्षेत्रीय कूटनीति से जुड़े मुद्दों को वैश्विक मंच पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
Super Fast Times
