झारखंड के पलामू जिले में कथित रूप से मिलावटी सरसों के तेल के सेवन से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत का मामला सामने आने के बाद खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है। प्रारंभिक जांच में सरसों के तेल में आर्जिमोन (सत्यानाशी) के तेल की मिलावट पाए जाने की बात कही गई है, जिसे स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित परिवार की मौतों का संबंध एपिडेमिक ड्रॉप्सी नामक गंभीर बीमारी से बताया गया है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इस बीमारी का कारण आर्जिमोन तेल से दूषित सरसों का तेल हो सकता है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।
आर्जिमोन तेल क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार, आर्जिमोन (सत्यानाशी) के बीज दिखने में सरसों के बीज जैसे लगते हैं। यदि प्रसंस्करण के दौरान इनकी मिलावट हो जाए, तो इससे तैयार तेल जहरीला हो सकता है। इसमें मौजूद सैन्गुइनरीन (Sanguinarine) नामक विषैला तत्व शरीर में पहुंचकर हृदय, लीवर, किडनी और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक सेवन करने पर शरीर में सूजन, सांस लेने में तकलीफ और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
मिलावटी सरसों के तेल की पहचान कैसे करें?
विशेषज्ञ कुछ सामान्य संकेतों के आधार पर सतर्क रहने की सलाह देते हैं—
- शुद्ध सरसों के तेल में तेज और तीखी प्राकृतिक गंध होती है।
- यदि तेल में सामान्य सरसों जैसी महक न हो या अजीब गंध आए, तो सावधानी बरतें।
- असली सरसों का तेल आमतौर पर गहरे पीले रंग का होता है, जबकि अत्यधिक हल्का या असामान्य रूप से साफ दिखने वाला तेल संदिग्ध हो सकता है।
- हमेशा विश्वसनीय ब्रांड या लाइसेंस प्राप्त विक्रेता से ही खाद्य तेल खरीदें और पैकिंग पर गुणवत्ता संबंधी जानकारी अवश्य जांचें।
क्या रखें सावधानी?
खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल घरेलू तरीकों से मिलावट की पूरी तरह पुष्टि नहीं की जा सकती। यदि किसी तेल की गुणवत्ता पर संदेह हो तो उसका सेवन न करें और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।
नोट: यदि मिलावटी तेल के सेवन के बाद शरीर में सूजन, सांस लेने में तकलीफ, कमजोरी या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर उपचार गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है
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