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रेंगकर सुरंग से बाहर निकले लोग, नेपाल में सेना ने जान जोखिम में डालकर किया रेस्क्यू

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। बाढ़ और मलबे की वजह से कई इलाकों में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। नेपाली सेना और स्थानीय सुरक्षा बल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें सुरक्षित निकालने में जुटे हैं।

इसी अभियान के दौरान रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से लोगों को बाहर निकालने का एक बेहद मुश्किल रेस्क्यू ऑपरेशन सामने आया है। सुरंग के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा भर गया था। बचाए गए लोगों को बेहद संकरे और मुश्किल रास्ते से रेंगते हुए बाहर निकलना पड़ा, जबकि सुरक्षाकर्मी उन्हें एक-एक करके सुरक्षित स्थान तक पहुंचाते नजर आए।

कीचड़ और मलबे के बीच रास्ता तलाशना बना चुनौती

नेपाली सेना के मुताबिक सुरंग के अंदर और आसपास भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण बचाव अभियान बेहद कठिन हो गया था। सुरंग के प्रवेश और निकास वाले हिस्सों तक पहुंचना भी आसान नहीं था।

बचाव दल को पहले सुरक्षित रास्ता तलाशना पड़ा और उसके बाद अंदर मौजूद लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने का काम किया गया। जवानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि किसी भी समय मलबा खिसक सकता था और रास्ता दोबारा बंद हो सकता था।

सेना ने अभियान के दौरान फंसे लोगों को प्राथमिकता के आधार पर बाहर निकालने पर ध्यान केंद्रित किया।

दुर्गम इलाकों में राहत कार्य मुश्किल

नेपाल की भौगोलिक स्थिति ने राहत और बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। पहाड़ी इलाकों में कई जगह सड़क और संपर्क मार्ग बाढ़ और मलबे की वजह से प्रभावित हुए हैं।

इस कारण राहत टीमों को प्रभावित लोगों की सही लोकेशन तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। कई इलाकों में सामान्य रास्ते पूरी तरह बाधित हो चुके हैं, जिससे बचाव दल को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।

भीषण बाढ़ में अब तक बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि एक हजार से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान चला रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय मदद की भी अपील

नेपाल में आई इस प्राकृतिक आपदा की गंभीरता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता जताई जा रही है। मानवीय सहायता से जुड़े संगठनों ने प्रभावित परिवारों के लिए तत्काल राहत और बचाव सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।

विशेषज्ञों और राहत संगठनों का कहना है कि कई परिवारों ने इस आपदा में अपने घर और जरूरी सामान गंवा दिए हैं। ऐसे समय में भोजन, मेडिकल सहायता, सुरक्षित ठिकाने और खोज-बचाव संसाधनों की सबसे ज्यादा जरूरत है।

नेपाल के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के उन इलाकों तक मदद पहुंचाना है, जहां बाढ़ और भूस्खलन के कारण संपर्क मुश्किल हो गया है।

कई किलोमीटर तक तबाही के निशान

प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों के मुताबिक बाढ़ का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही समय में घर, सड़कें और दूसरी संरचनाएं पानी और मलबे की चपेट में आ गईं।

कई जगह मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा बह जाने की जानकारी सामने आई है। कुछ इलाकों में करीब 30 से 35 किलोमीटर तक सड़क और आसपास का क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित बताया जा रहा है।

तबाही का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, जबकि कुछ इलाकों में अभी भी लोग अपने लापता परिजनों की तलाश कर रहे हैं।

नेपाल में फिर बढ़ा बाढ़ का खतरा

पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों के बीच नेपाल के सामने एक और खतरा पैदा हो गया है। तिब्बत सीमा के पास ग्यिरोंग बॉर्डर पोर्ट के ऊपरी हिस्से में मौजूद एक प्राकृतिक जलाशय या बैरियर लेक के किनारे को नुकसान पहुंचने की सूचना है।

अगर वहां जमा पानी अचानक नीचे की ओर बहता है तो आसपास के क्षेत्रों में दोबारा तेज बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है।

राहत अभियान के बीच नई चुनौती

नेपाल में जारी रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर दिखाया है कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदा के बाद बचाव कार्य कितना कठिन हो सकता है। एक तरफ सेना और स्थानीय सुरक्षा बल सुरंगों और मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ नए बाढ़ के खतरे ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल प्रभावित क्षेत्रों में सबसे ज्यादा ध्यान लापता लोगों की तलाश, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और संभावित नए खतरे वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने पर है।

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