आजकल सोशल मीडिया पर “सुपरफूड” और घरेलू नुस्खों से डायबिटीज ठीक करने के दावे तेजी से वायरल होते हैं। लेकिन सच यह है कि डायबिटीज एक जटिल मेटाबॉलिक बीमारी है, जिसका इलाज किसी एक मसाले, जड़ी-बूटी या घरेलू उपाय से संभव नहीं है।
Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital की कंसल्टेंट डाइटीशियन Aishwarya A. Kumbhakoni के अनुसार, डायबिटीज मैनेजमेंट के लिए व्यक्तिगत और व्यवस्थित योजना जरूरी है—जिसमें दवा, संतुलित आहार, व्यायाम और नियमित मॉनिटरिंग शामिल हों।
क्या मेथी, जामुन या दालचीनी डायबिटीज “ठीक” कर सकते हैं?
भारतीय घरों में आम धारणा है कि:
मेथी दाना
जामुन
दालचीनी
डायबिटीज को खत्म कर सकते हैं।
एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि अब तक किसी एक खाद्य पदार्थ को डायबिटीज का इलाज साबित नहीं किया गया है। हां, ये चीजें संतुलित आहार का हिस्सा हो सकती हैं, लेकिन ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए दवा और लाइफस्टाइल मैनेजमेंट जरूरी है।
क्या ज्यादा चीनी खाने से सीधे डायबिटीज होती है?
यह आधा सच है।
रिफाइंड शुगर और हाई-कैलोरी फूड का ज्यादा सेवन वजन बढ़ाता है।
पेट के आसपास चर्बी बढ़ने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है।
मीठे पेय (कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक) टाइप 2 डायबिटीज के जोखिम से जुड़े हैं।
ध्यान रखें:
टाइप 1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जो चीनी खाने से नहीं होती।
टाइप 2 डायबिटीज में लाइफस्टाइल और वजन अहम भूमिका निभाते हैं।
क्या डायबिटीज में फल पूरी तरह छोड़ देने चाहिए?
नहीं।
फलों में प्राकृतिक शुगर के साथ:
फाइबर
विटामिन
एंटीऑक्सीडेंट
भी होते हैं।
जूस की बजाय साबुत फल लें और मात्रा नियंत्रित रखें।
क्या गुड़ और शहद चीनी से ज्यादा सुरक्षित हैं?
यह एक बड़ा मिथक है।
गुड़, शहद और सफेद चीनी—तीनों ही साधारण कार्बोहाइड्रेट हैं और ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकते हैं।
इसी तरह:
चावल पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं
“शुगर-फ्री” मिठाइयां भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं (इनमें फैट और कैलोरी ज्यादा हो सकती है)
क्या सिर्फ मोटे लोगों को डायबिटीज होती है?
नहीं।
दुबले दिखने वाले लोगों में भी अंदरूनी (विसरल) फैट इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ा सकता है। इसलिए वजन सामान्य होने पर भी जोखिम हो सकता है।
सही तरीका क्या है?
मेडिकल न्यूट्रिशन थेरेपी
संतुलित भोजन (फाइबर + प्रोटीन + नियंत्रित कार्ब्स)
नियमित व्यायाम
ब्लड शुगर मॉनिटरिंग
डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा
डायबिटीज का कोई चमत्कारी इलाज नहीं है, लेकिन सही जानकारी और अनुशासन से इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञों और रिसर्च पर आधारित है। इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी बदलाव से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।
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