BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने भारत की कूटनीतिक क्षमता की खुलकर सराहना करते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने में भारत भविष्य में अहम भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बनाए रखने और लंबे समय तक संवाद कायम रखने के लिए भारत एक भरोसेमंद और प्रभावशाली साझेदार साबित हो सकता है।
लावरोव ने कहा कि मौजूदा समय में पाकिस्तान तत्काल बातचीत शुरू कराने की कोशिशों में सहयोग कर रहा है, लेकिन यदि दीर्घकालिक समाधान और स्थायी मध्यस्थता की जरूरत पड़ी तो भारत बेहतर विकल्प बन सकता है। उनके अनुसार भारत के पास दशकों का कूटनीतिक अनुभव, वैश्विक स्तर पर मजबूत साख और पश्चिम एशियाई देशों के साथ संतुलित संबंध हैं।
रूसी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत दुनिया के बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और उसकी बड़ी तेल जरूरतें पश्चिम एशिया से पूरी होती हैं। ऐसे में क्षेत्र में किसी बड़े संघर्ष का असर सीधे भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है। उन्होंने विशेष रूप से Strait of Hormuz का जिक्र करते हुए कहा कि यहां तनाव बढ़ने से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
लावरोव के मुताबिक BRICS एक संगठन के रूप में औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाएगा, लेकिन उसके सदस्य देश व्यक्तिगत स्तर पर शांति और संवाद को बढ़ावा देने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे जरूरी उद्देश्य क्षेत्रीय तनाव को कम करना और बातचीत का रास्ता खुला रखना है।
अपने बयान में लावरोव ने बिना सीधे नाम लिए कुछ वैश्विक शक्तियों पर पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ आक्रामक माहौल बनाने में United States और Israel की नीतियां अहम भूमिका निभा रही हैं। उनका कहना था कि किसी भी संघर्ष को समझने के लिए उसकी जड़ों और राजनीतिक परिस्थितियों का विश्लेषण जरूरी है।
इस दौरान उन्होंने यह भी पुष्टि की कि Narendra Modi इस वर्ष रूस में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए दौरा करेंगे। रूस ने भारत के साथ ऊर्जा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत बताया।
रूस और भारत के बीच आर्थिक सहयोग पर बोलते हुए लावरोव ने कहा कि दोनों देश डॉलर पर निर्भरता कम करने और राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनका कहना था कि वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में संतुलन लाने के लिए वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों पर काम किया जा रहा है।
लावरोव के बयान के बाद एक बार फिर भारत की ‘शांति दूत’ वाली छवि पर चर्चा तेज हो गई है। भारत पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संकटों और संयुक्त राष्ट्र शांति अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुका है। हाल के वर्षों में भारत लगातार संवाद, संतुलन और शांतिपूर्ण समाधान की नीति पर जोर देता रहा है।
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