United States और Iran के बीच लंबे समय से जारी सैन्य तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच युद्धविराम और स्थायी शांति को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही वार्ता में कई अहम मुद्दों पर सहमति बनती नजर आ रही है।
अगले 48 घंटे हो सकते हैं बेहद अहम
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका को अगले 48 घंटों के भीतर ईरान की ओर से औपचारिक जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल किसी समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं, लेकिन बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है।
बताया जा रहा है कि दोनों देशों के प्रतिनिधि 14 सूत्रीय मसौदे पर चर्चा कर रहे हैं। इस वार्ता में Donald Trump की ओर से स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं, जबकि ईरानी अधिकारी भी लगातार बातचीत में हिस्सा ले रहे हैं।
समझौते में क्या-क्या हो सकता है शामिल?
प्रस्तावित मसौदे के मुताबिक:
- होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही दोबारा शुरू की जाएगी
- ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम को सीमित या अस्थायी रूप से रोक सकता है
- अमेरिका कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दे सकता है
- दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई रोकी जा सकती है
हालांकि परमाणु कार्यक्रम को कितने समय तक रोका जाएगा, इस पर अभी भी मतभेद बने हुए हैं।
ईरान ने रखी अपनी शर्त
Iran ने साफ किया है कि वह किसी भी शांति समझौते को तभी स्वीकार करेगा जब वह “निष्पक्ष और संतुलित” होगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता से समझौता नहीं किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि अप्रैल में Islamabad में हुई लंबी वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन उस समय कोई अंतिम नतीजा नहीं निकल पाया था।
ट्रंप ने रोका ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’
इस बीच Donald Trump ने होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे अमेरिकी नौसैनिक अभियान “Project Freedom” को अस्थायी रूप से रोकने का ऐलान किया है। यह अभियान क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए शुरू किया गया था।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ “पूर्ण और अंतिम समझौते” की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो अमेरिका फिर से नाकेबंदी या सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्प अपना सकता है।
दुनिया की नजर इस समझौते पर
Strait of Hormuz दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां तनाव कम होने से वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ी राहत मिल सकती है।
अब पूरी दुनिया की नजर अगले कुछ दिनों पर टिकी है, क्योंकि यह समझौता मिडिल ईस्ट की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर बड़ा असर डाल सकता है।
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