भारतीय मूल के नासा (NASA) के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लगभग आठ महीने लंबे मिशन पर रवाना हो गए हैं। उन्होंने दो रूसी अंतरिक्ष यात्रियों प्योत्र डुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ कजाकिस्तान स्थित बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के जरिए उड़ान भरी।
मिशन के तहत अंतरिक्ष यान को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने में करीब तीन घंटे का समय लगेगा। वहां पहुंचने के बाद यह स्वचालित प्रणाली के माध्यम से स्टेशन के प्रिचाल मॉड्यूल से जुड़ जाएगा। यह अनिल मेनन का पहला अंतरिक्ष मिशन है, जबकि उनके साथ गए दोनों रूसी अंतरिक्ष यात्री पहले भी अंतरिक्ष यात्रा कर चुके हैं।
अंतरिक्ष स्टेशन पहुंचने के बाद यह दल पहले से मौजूद नासा, यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और रूसी अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ मिलकर विभिन्न वैज्ञानिक प्रयोगों और तकनीकी परियोजनाओं पर काम करेगा।
नासा के अनुसार, मिशन के दौरान अनिल मेनन अंतरिक्ष में वैज्ञानिक अनुसंधान, नई तकनीकों के परीक्षण और मानव अंतरिक्ष अन्वेषण से जुड़े कई प्रयोगों में हिस्सा लेंगे। इन अध्ययनों का उद्देश्य भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों को बेहतर बनाना और ऐसी तकनीकों का विकास करना है, जिनका उपयोग पृथ्वी पर भी किया जा सके।
मिशन लगभग आठ महीने तक चलेगा और वर्तमान कार्यक्रम के अनुसार अनिल मेनन तथा उनके दोनों साथी अप्रैल 2027 में पृथ्वी पर लौटेंगे।
कौन हैं अनिल मेनन?
49 वर्षीय अनिल मेनन का जन्म अमेरिका के मिनियापोलिस में भारतीय और यूक्रेनी मूल के परिवार में हुआ था। वह पेशे से इमरजेंसी मेडिसिन विशेषज्ञ हैं और अमेरिकी स्पेस फोर्स में कर्नल के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने अमेरिकी वायुसेना के साथ अफगानिस्तान में भी कार्य किया है और हिमालयन रेस्क्यू एसोसिएशन के साथ मिलकर माउंट एवरेस्ट क्षेत्र में पर्वतारोहियों को चिकित्सा सहायता भी प्रदान की है।
उन्होंने भारत में पोलियो टीकाकरण कार्यक्रम से जुड़े कार्यों में भी योगदान दिया था। वर्ष 2014 में उन्होंने नासा में फ्लाइट सर्जन के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर कार्यरत अंतरिक्ष यात्रियों के साथ काम किया।
दिसंबर 2021 में उनका चयन नासा के अंतरिक्ष यात्री कार्यक्रम के लिए हुआ, जिसके बाद उन्होंने दो वर्षों का विशेष प्रशिक्षण पूरा किया। उनकी पत्नी अन्ना विल्हेम भी अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़ी हैं और वर्ष 2024 में स्पेसएक्स के निजी मानव अंतरिक्ष मिशन पोलारिस डॉन का हिस्सा रह चुकी हैं।
इस मिशन के साथ भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों की वैश्विक अंतरिक्ष अभियानों में भागीदारी को एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
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