अमेरिका-ईरान वार्ता से जुड़े घटनाक्रम के बीच एक वीडियो सामने आने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। इस वीडियो में अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance को एक शख्स से मिलवाते हुए देखा गया, जिसकी पहचान बाद में उमर फारूक ज़हूर के रूप में हुई। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी मौजूदगी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं।
कौन हैं उमर फारूक ज़हूर?
उमर फारूक ज़हूर का जन्म नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में हुआ था और उनके परिवार की जड़ें पाकिस्तान के सियालकोट से जुड़ी हैं। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी छवि अलग-अलग देशों में बिल्कुल अलग है—नॉर्वे में वे आर्थिक अपराधों के आरोपी हैं, जबकि पाकिस्तान में उन्हें एक सफल निवेशक और कारोबारी के रूप में देखा जाता है।
नॉर्वे में आरोप और केस
नॉर्वे में ज़हूर के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई 2003 में हुई थी, जब उन्हें अपने ही परिवार के ट्रैवल बिजनेस से धन गबन के मामले में दोषी ठहराया गया। हालांकि, सजा सुनाए जाने के समय वे देश छोड़कर चले गए थे।
इसके बाद 2010 से नॉर्वे की एजेंसियां उन्हें एक बड़े बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तलाश रही हैं। आरोप है कि नॉर्डिया बैंक से जुड़े एक मामले में करोड़ों की हेराफेरी हुई थी। हालांकि ज़हूर इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं।
दूसरे देशों में भी विवाद
स्विट्जरलैंड में भी उनके खिलाफ जांच हुई थी, जहां उन पर फर्जी बैंक के जरिए निवेशकों से लाखों डॉलर की धोखाधड़ी के आरोप लगे। इसके अलावा घाना के एक बड़े पावर प्रोजेक्ट से जुड़े विवाद में भी उनका नाम सामने आया, हालांकि इन मामलों में कोई ठोस सजा नहीं हो सकी।
पाकिस्तान में अलग पहचान
यूरोप में लगे आरोपों के उलट पाकिस्तान में ज़हूर की छवि एक बड़े निवेशक की है। उन्हें देश में विदेशी निवेश लाने का श्रेय दिया जाता है। इसी योगदान के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति Asif Ali Zardari ने उन्हें ‘हिलाल-ए-इम्तियाज़’ जैसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा।
इमरान खान केस से जुड़ाव
ज़हूर का नाम पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री Imran Khan से जुड़े तोशाखाना मामले में भी सामने आया था। उन्होंने इस मामले में व्हिसलब्लोअर के तौर पर जानकारी देने का दावा किया था।
इंटरपोल और कानूनी स्थिति
एक समय उनके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था, लेकिन 2022 में इसे वापस ले लिया गया। पाकिस्तान में भी उन्हें कुछ मामलों में कानूनी राहत मिल चुकी है।
इस्लामाबाद में मौजूदगी पर उठे सवाल
11 अप्रैल को इस्लामाबाद में जेडी वेंस और अमेरिकी प्रतिनिधियों के साथ उनकी मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि वे किसी आधिकारिक टीम का हिस्सा थे या निजी तौर पर वहां मौजूद थे, लेकिन उनकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच और भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
विरोधाभास से भरी कहानी
उमर फारूक ज़हूर की कहानी एक ही व्यक्ति की दो अलग-अलग छवियां दिखाती है—एक तरफ नॉर्वे में वांटेड आरोपी, तो दूसरी ओर पाकिस्तान में सम्मानित निवेशक। यही विरोधाभास इस पूरे मामले को और ज्यादा जटिल और चर्चा का विषय बना रहा है।
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