Lawrence Wong ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी तनाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि इस समुद्री मार्ग पर लंबे समय से बनी रुकावट का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है और इसके परिणाम 1970 के दशक के तेल संकट जैसे हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री वोंग के मुताबिक, यह संकट केवल तेल और गैस की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी भारी दबाव डाल सकता है। एशिया के वे देश, जो खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा आयात पर काफी निर्भर हैं, सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कई जगह ईंधन की कमी की खबरें आने लगी हैं। कुछ एयरलाइंस ने उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है, जबकि उद्योगों और फैक्ट्रियों में उत्पादन और सप्लाई में देरी देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आगे चलकर खाद, भोजन और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता पर भी असर पड़ सकता है।
वोंग ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर भविष्य में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा खुल भी जाता है, तब भी हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे। उनके अनुसार, समुद्री मार्गों की सुरक्षा बहाल करने, बारूदी सुरंगों को हटाने और बंदरगाहों के ढांचे को फिर से व्यवस्थित करने में लंबा समय लग सकता है। साथ ही शिपिंग और बीमा कंपनियों को भरोसा लौटने में भी महीनों लग सकते हैं।
अपने संबोधन में उन्होंने 1970 के दशक के तेल संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में दुनिया ने “स्टैगफ्लेशन” जैसी कठिन आर्थिक स्थिति देखी थी, जहां महंगाई तेजी से बढ़ी थी और बेरोजगारी भी उच्च स्तर पर पहुंच गई थी। उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा हालात में वैसा ही खतरा फिर से उभर सकता है।
International Energy Agency की चेतावनी का जिक्र करते हुए वोंग ने कहा कि मौजूदा ऊर्जा संकट कुछ मामलों में 1970 के दशक से भी ज्यादा गंभीर साबित हो सकता है। इसलिए देशों को आर्थिक और रणनीतिक स्तर पर पहले से तैयारी करनी होगी, ताकि आने वाले महीनों में बढ़ने वाले दबाव का सामना किया जा सके।
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