पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 15 जुलाई को प्रस्तावित मुजफ्फराबाद मार्च को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में राजधानी मुजफ्फराबाद पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करने के लिए अतिरिक्त अर्धसैनिक बलों की तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शन के आयोजकों ने बड़ी संख्या में लोगों से मार्च में शामिल होने की अपील की है। वहीं पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती को मंजूरी दी है। बताया जा रहा है कि मुजफ्फराबाद और मीरपुर सहित संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत की जा रही है।
रावलाकोट समेत कई इलाकों में पिछले कई दिनों से धरना और प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी स्थानीय प्रशासन और पाकिस्तान सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि 15 जुलाई का मार्च उनके आंदोलन का महत्वपूर्ण चरण होगा और उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की है। दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जा रहे हैं।
इस बीच, हाल के दिनों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों तथा गोलीबारी की भी खबरें सामने आई हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए गए हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
प्रदर्शनकारी संगठनों ने यह भी आरोप लगाया है कि आंदोलन के दौरान घायलों को पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है, जबकि 15 जुलाई को प्रस्तावित मुजफ्फराबाद मार्च को लेकर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
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