भारत और श्रीलंका के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग को लेकर अहम बातचीत हुई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय शांति, समुद्री सुरक्षा और दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।
बैठक के दौरान श्रीलंकाई राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि उनके देश की जमीन का इस्तेमाल भारत के सुरक्षा हितों के खिलाफ किसी भी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। भारत और श्रीलंका के बीच इस समझ को हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
‘भारत के खिलाफ नहीं होने देंगे अपनी जमीन का इस्तेमाल’
अनुरा कुमार दिसानायके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी पिछली मुलाकातों का जिक्र करते हुए भारत की सुरक्षा चिंताओं को लेकर श्रीलंका का रुख स्पष्ट किया।
उन्होंने कहा कि श्रीलंका अपने क्षेत्र का इस्तेमाल ऐसी किसी गतिविधि के लिए नहीं होने देगा, जो भारत के सुरक्षा हितों के विपरीत हो। दोनों देशों के बीच भौगोलिक निकटता और समुद्री साझेदारी को देखते हुए यह प्रतिबद्धता काफी अहम मानी जा रही है।
भारत की ओर से भी राजनाथ सिंह ने दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत श्रीलंका को सहायता देना केवल एक औपचारिकता या एहसान नहीं मानता, बल्कि पड़ोसी देश के तौर पर जरूरत के समय सहयोग करना अपनी जिम्मेदारी समझता है।
करीब चार दशक बाद भारतीय रक्षा मंत्री का श्रीलंका दौरा
राजनाथ सिंह की श्रीलंका यात्रा कई मायनों में महत्वपूर्ण है। करीब 38 वर्षों के बाद पहली बार कोई भारतीय रक्षा मंत्री श्रीलंका पहुंचा है।
इस दौरे को भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से जोड़कर देखा जा रहा है। दोनों देशों ने आपसी रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जाहिर की है।
श्रीलंका की L-70 एयर डिफेंस गन्स होंगी अपग्रेड
बैठक के दौरान रक्षा क्षेत्र में सहयोग से जुड़े कई अहम समझौतों का भी आदान-प्रदान हुआ। इनमें श्रीलंकाई वायुसेना की L-70 एयर डिफेंस गन्स को आधुनिक बनाने से जुड़ा समझौता प्रमुख है।
इस योजना के तहत श्रीलंकाई वायुसेना की छह L-70 तोपों को भारत सरकार की ओर से मिलने वाले अनुदान के जरिए अपग्रेड किया जाएगा। इन हथियार प्रणालियों के आधुनिकीकरण से श्रीलंका में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ये एयर डिफेंस गन्स पहले भारत की ओर से श्रीलंकाई वायुसेना को उपलब्ध कराई गई थीं।
NCC और नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच भी सहयोग
रक्षा क्षेत्र के अलावा भारत और श्रीलंका के राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) तथा नेशनल डिफेंस कॉलेज के बीच सहयोग बढ़ाने से जुड़े समझौता ज्ञापनों का भी आदान-प्रदान किया गया।
इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के रक्षा संस्थानों और प्रशिक्षण से जुड़े क्षेत्रों में आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।
हिंद महासागर में सहयोग बढ़ाने पर जोर
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत और श्रीलंका के बीच मजबूत सहयोग केवल दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत और श्रीलंका करीबी पड़ोसी होने के साथ-साथ ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध साझा करते हैं। दोनों देश अपने विकास और जनता के हितों के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।
श्रीलंका की ओर से भारत के खिलाफ अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देने का स्पष्ट संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक और समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की सक्रियता लगातार बढ़ रही है।
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