जन्म से सुनने में असमर्थ बच्चों और युवाओं के लिए मेडिकल साइंस ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में सामने आई एक रिसर्च के अनुसार, एक खास जीन थेरेपी इंजेक्शन की मदद से जन्मजात बहरेपन के कुछ मामलों में सुनने की क्षमता काफी हद तक वापस लाई जा सकी है।
यह उपचार खास तौर पर उन मरीजों के लिए प्रभावी पाया गया है, जिनकी सुनने की समस्या OTOF जीन में बदलाव (mutation) के कारण होती है। यह जीन ओटोफरलिन प्रोटीन बनाने में मदद करता है, जो कान से दिमाग तक ध्वनि संकेत पहुंचाने में अहम भूमिका निभाता है। जब यह जीन ठीक से काम नहीं करता, तो आवाज कान तक पहुंचने के बावजूद मस्तिष्क तक सही संकेत नहीं जा पाती।
रिसर्च में 1 से 24 वर्ष की उम्र के 10 मरीजों पर परीक्षण किया गया। वैज्ञानिकों ने एक सुरक्षित वायरस (AAV) के जरिए OTOF जीन की स्वस्थ कॉपी को कान के अंदर एक छोटे इंजेक्शन के माध्यम से पहुंचाया। यह इंजेक्शन कॉक्लिया के निचले हिस्से में दिया गया।
सबसे उत्साहजनक बात यह रही कि सभी मरीजों में सुनने की क्षमता में सुधार देखा गया। कई मरीजों ने एक महीने के भीतर फर्क महसूस करना शुरू कर दिया, जबकि 6 महीने बाद सुनने की क्षमता में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया। औसतन मरीजों की सुनने की क्षमता लगभग 106 dB से सुधरकर 52 dB तक पहुंच गई।
बच्चों में इसका असर सबसे बेहतर देखा गया, विशेषकर 5 से 8 साल की उम्र के बीच। एक 7 वर्षीय बच्ची इलाज के कुछ महीनों बाद लगभग सामान्य रूप से सुनने और अपनी मां से बातचीत करने लगी।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह इलाज हर प्रकार के बहरेपन के लिए नहीं है। फिलहाल यह थेरेपी केवल OTOF जीन से जुड़े विशेष प्रकार के जन्मजात बहरेपन पर प्रभावी साबित हुई है। अन्य कारणों से होने वाली सुनने की समस्या के लिए अभी अलग शोध जारी है।
महत्वपूर्ण सूचना:
यह खबर वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित है, लेकिन इसे व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह न माना जाए। यदि किसी बच्चे में जन्म से सुनने की समस्या है, तो ENT विशेषज्ञ और जेनेटिक टेस्टिंग विशेषज्ञ से सलाह लेना आवश्यक है।
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