संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा अपना कर्ज वापस मांगने के बाद पाकिस्तान की आर्थिक मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को इस महीने करीब 3.5 अरब डॉलर का कर्ज यूएई को चुकाना है, जिसके बाद देश की वित्तीय स्थिति पर दबाव और गहरा गया है।
कर्ज चुकाने की इस स्थिति में पाकिस्तान अब एक बार फिर चीन और सऊदी अरब से आर्थिक मदद लेने की कोशिश कर रहा है। बताया जा रहा है कि इस समय यदि पाकिस्तान यूएई को भुगतान करता है तो उसका विदेशी मुद्रा भंडार काफी कम हो सकता है, जिससे आयात और आर्थिक स्थिरता पर असर पड़ेगा।
आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के पास फिलहाल लगभग 16 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो मुश्किल से तीन महीनों के आयात के लिए पर्याप्त माना जा रहा है।
इसी बीच पाकिस्तान सरकार के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब ने कहा है कि फरवरी के अंत तक देश की विदेशी मुद्रा स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर थी और वह कर्ज चुकाने की स्थिति में था, लेकिन हाल के वैश्विक और क्षेत्रीय हालात ने स्थिति को प्रभावित किया है।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बाजार में दोबारा वापसी की तैयारी कर रहा है और इस साल यूरो बॉन्ड जारी करने पर विचार किया जा रहा है, जिससे विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके।
इसके साथ ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी राहत पैकेज की अगली किस्त जारी होने की उम्मीद लगाए बैठा है। सरकार का कहना है कि फिलहाल अतिरिक्त सहायता या कार्यक्रम विस्तार की कोई तत्काल मांग नहीं की गई है, लेकिन आर्थिक स्थिति बिगड़ने पर IMF से संपर्क किया जा सकता है।
कुल मिलाकर, यूएई के कर्ज दबाव के बाद पाकिस्तान की आर्थिक चुनौतियां और बढ़ गई हैं, और वह फिर से अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और मित्र देशों पर निर्भर होता नजर आ रहा है।
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