United Nations में सोमवार को United States और Iran के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विवाद उस समय बढ़ गया जब परमाणु अप्रसार संधि (NPT) की समीक्षा सम्मेलन के उपाध्यक्ष पद के लिए ईरान के चयन पर अमेरिका ने कड़ा विरोध जताया।
अमेरिका के हथियार नियंत्रण और अप्रसार ब्यूरो के सहायक सचिव Christopher Yoo ने कहा कि ईरान अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पालन नहीं कर रहा है और International Atomic Energy Agency के साथ पूर्ण सहयोग करने में भी विफल रहा है। उन्होंने इस पद पर ईरान की नियुक्ति को अनुचित और अपमानजनक बताया।
अमेरिका के इन आरोपों पर ईरान की ओर से कड़ा जवाब दिया गया। आईएईए में ईरान के राजदूत Reza Najafi ने अमेरिकी दावों को खारिज करते हुए उन्हें राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने यह भी कहा कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाले देश को दूसरों पर आरोप लगाने का नैतिक अधिकार नहीं है।
इस विवाद के बीच António Guterres ने चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की। उन्होंने दोहराया कि किसी भी तरह के टकराव का सैन्य समाधान संभव नहीं है और शांति वार्ता ही आगे का रास्ता है।
इसी दौरान ईरान ने संकेत दिया कि अगर उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाते हैं, तो वह Strait of Hormuz को खोलने पर विचार कर सकता है। इस बयान को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई गई है, क्योंकि यह क्षेत्र वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
गौरतलब है कि 1980 के दशक से अमेरिका और ईरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। दोनों देश अक्सर सीधे संवाद के बजाय अंतरराष्ट्रीय मंचों के जरिए अपनी बात रखते हैं। जहां ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है, वहीं अमेरिका को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
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