अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर हालात और गंभीर हो गए हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक उसकी कथित जब्त की गई संपत्तियां जारी नहीं की जातीं, तब तक वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बंद रखने के अपने फैसले पर कायम रहेगा।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया कि आर्थिक दबाव के बीच यह कदम रणनीतिक तौर पर उठाया गया है। उनका कहना है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और संपत्तियों की जब्ती के जवाब में यह निर्णय लिया गया है।
दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि होर्मुज क्षेत्र पर अमेरिका का नियंत्रण है और अमेरिकी नौसेना को संदिग्ध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, ईरानी मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह जलमार्ग ईरान की सैन्य निगरानी में है।
बढ़ती समुद्री तनातनी
हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ईरान ने हाल ही में तीन विदेशी जहाजों को निशाना बनाया। इनमें “फ्रांसेस्का” और “एपामिनोंडास” को कब्जे में लिया गया, जबकि “यूफोरिया” नामक जहाज पर गोलीबारी की गई।
इन जहाजों में भारतीय नाविक भी सवार थे। अधिकारियों के अनुसार, सभी भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं, जो इस तनावपूर्ण स्थिति में राहत की बात है।
भारत की प्रतिक्रिया
बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत ने मिडिल ईस्ट में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है, जिसमें उन्हें सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।
वैश्विक असर
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह गतिरोध जल्द खत्म नहीं हुआ, तो इसका असर लंबे समय तक दुनिया की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल, अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनी हुई है, लेकिन जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज पर संकट बरकरार रहने की संभावना है।
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